दीवानी मामले ( Civil Case) मामले का आशय प्रस्तावना
जहां किसी समूह, समाज, प्रदेश एवं देश की स्थापना होती है तो उस समाज व समूह के मध्य कुछ अनुबंध कारित होते है जिसमें एक दूसरे के मध्य संपत्ति, किसी प्रकार का अनुबंध, पारिवारिक आपसी मतभेद आदि आते है। जब इनका किसी एक पक्षकार के द्वारा उल्लंघन किया जाता है तो ऐसी स्थिति में सिविल मामले कायम किये जाते है। जिसमें मामलो का आपसी तौर पर निपटाया जाता है कारित हुई क्षति/हर्जाना/मुआवजा को प्राप्त करने पर अधिकार होता है और हुई हानि को राशि में आकलन करके भुगतान किया जाता है पक्षकार का स्पष्ट उध्देय होता है कि मुआवजे मिले न कि किसी भी प्रकार की जेल/कारावास न हों । जो अपराधिक मामले नही होते है। ऐसे मामलों को दीवानी मामले ( Civil Case) के रूप में जाने जाते है। इन मामलों के भारतीय न्याय प्रणाली में दीवानी प्रक्रिया सहित CPC के अंतर्गत रखा गया है।
दीवानी मामले ( Civil Case) परिभाषा
परिभाषा – ऐसे मामले जो किसी व्यक्ति, संस्था एवं परिवार के मध्य कायम किये जाते है जिसमें प्रत्येक पक्षकार के अपने निधि अधिकार होते है। उन निजी अधिकारी को हनन जब एक पक्षकार के द्वारा किया जाता है ऐसी स्थिति में संबंधित पक्षकार के अधिकार के हनन से हुई हानि / क्षति का हर्जाना/मुआवजा चाह रखता है जिसे पाने के उध्देश्य से माननीय न्यायालय की शरण लेता है ऐसे मामालों को दीवानी मामले ( Civil Case) कहा जाता है।
दीवानी मामले ( Civil Case) के प्रकार
दीवानी मामले ( Civil Case) के लगभग 05 प्रकार होते है। जिनका विस्तार पूर्वक जानकारी hindimelaw.in के माध्यम से आपके साथ साक्षा की जा रही है।
संपत्ति विवाद (Property Disputes)
जब किसी व्यक्ति संस्था या संगठन के मध्य जमीन या मकान के स्वामित्व को लेकर विवाद ,सीमा (boundary) का झगड़ा एवं कब्जा (possession) संबंधित आपसी विवाद उत्पन्न होतो है ऐसे मामलों के निपटारे हेतु माननीय न्यायालय की शरण ली जाती है। उसे संपत्ति विवाद कहा जाता है।

अनुबंध (Contract) विवाद
जब किसी व्यक्ति संस्था या संगठन के मध्य किसी समझौते (agreement) का उल्लंघन एवं व्यापारिक सौदे में धोखा या शर्त न मानना आदि से संबंधित विवाद उत्पन्न होता है ऐसे मामलों के निपटारे हेतु माननीय न्यायालय की शरण ली जाती है। उसे अनुबंध (Contract) विवाद कहा जाता है।

पारिवारिक मामले (Family Disputes)
जब किसी परिवार के मध्य आपसी तालमेल खराब होता है खासकर के पति पत्नि के मध्य जिसमें तलाक (Divorce), भरण पोषण (Maintenance), बच्चों की कस्टडी (Custody) आदि से संबंधित विवाद उत्पन्न होता है ऐसे मामलों के निपटारे हेतु माननीय न्यायालय की शरण ली जाती है। उसे पारिवारिक मामले (Family Disputes) कहा जाता है।
हर्जाना (Compensation) मामले
जब किसी व्यक्ति संस्या या संगठन के मध्य दुर्घटना में नुकसान का मुआवज़ा, चिकित्सा लापरवाही (Medical negligence), बीमा (Insurance) क्लेम आदि विवाद उत्पन्न होता है ऐसे मामलों के निपटारे हेतु माननीय न्यायालय की शरण ली जाती है। उसे हर्जाना (Compensation) मामले कहा जाता है।

निषेधाज्ञा (Injunction)
किसी कार्य को रोकने के लिए अदालत का आदेश जैसे: अवैध निर्माण रोकना के लिये या अन्य ऐसे कार्य जिससे किसी के अधिकारों का हनन हो रहा हो उसे रोकने हेतु माननीय न्यायालय की शरण ली जाती है उसे निषेधाज्ञा (Injunction) कहा जाता है।
इन सभी प्रकार के मामलों को निपटारे हेतु संपर्क करे
एडबोकेट राहुल सिंह जाट, सिविल कोर्ट नरसिंहपुर
मोबाईल नंबर – 9424301662,8770212232
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